IIT बॉम्बे छात्र साहिल की मौत पर बवाल, प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला सस्पेंड

मुंबई
आईआईटी बॉम्बे में छात्र की आत्महत्या के कुछ दिनों बाद बड़ी खबर सामने आ रही है. पिछले 3 दिनों से लगातार धरने पर बैठे छात्रों की मांगों को मानते हुए संस्थान ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला को निलंबित कर दिया है. डूल्ला पर छात्र को प्रताड़ित करने के आरोप लगाए गए हैं. पुलिस ने छात्र के माता-पिता की शिकायत पर प्रोफेसर डूल्ला के खिलाफ मामला भी दर्ज कर लिया है।
मुंबई पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक आईआईटी बॉम्बे में छात्र की आत्महत्या के मामले को अब मुंबई क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया है. अब इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच ही करेगी।
बता दें कि हाल ही में आईआईटी बॉम्बे में एक छात्र ने आत्महत्या कर ली थी, जिस पर परीक्षा में नकल करने का आरोप था. इस घटना के विरोध में छात्र सड़क पर उतर आए थे और तीन दिनों से कैंपस के मुख्य गेट पर धरना दे रहे थे. छात्रों की मांग थी कि छात्र की सुसाइड के लिए जिम्मेदार प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला पर कार्रवाई की जाए और उन्हें तत्काल सस्पेंड किया जाए. इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि उनकी 18 सूत्रीय मांगों को माना जाए. करीब 3 दिन तक चले लंबे तनाव के बाद आखिरकार छात्रों की मांगें मान ली गई हैं।
आखिर क्या था पूरा मामला?
IIT बॉम्बे के पवई कैंपस में एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के दूसरे साल के BTech स्टूडेंट साहिल रवींद्र वाकोडे (22) शुक्रवार शाम अपने हॉस्टल के कमरे में छत के पंखे से लटके हुए पाए गए थे. यह घटना मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन और ChatGPT का इस्तेमाल करते हुए पकड़े जाने के कुछ घंटों बाद हुई।
उनके परिवार का आरोप है कि महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के रहने वाले वाकोडे को यह कदम उठाने से पहले संस्थागत उत्पीड़न और जाति-आधारित भेदभाव का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद कैंपस में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों का दावा है कि वाकोडे पर भारी दबाव था और उन्हें एकेडमिक सस्पेंशन की धमकियां दी जा रही थीं।
छात्र के माता-पिता की शिकायत पर, पुलिस ने शनिवार को भारतीय न्याय संहिता और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में FIR दर्ज की।
घटना के तुरंत बाद, जब पुलिस मामले की शुरुआती तहकीकत ही कर रही थी, तब आईआईटी प्रशासन ने एक बयान जारी कर दिया था. उस बयान में घटना से जुड़ी कुछ ऐसी परिस्थितियों का जिक्र कर दिया गया था, जो आधिकारिक तौर पर साबित नहीं हुई थीं।
जांच जारी रहने के बीच ही संस्थान के इस रवैये और जल्दबाजी में दिए गए बयान पर सवाल उठने लगे, जिसके बाद बैकफुट पर आए प्रशासन को 'X' (ट्विटर) पर आकर आधिकारिक तौर पर माफी मांगनी पड़ी।
IIT बॉम्बे ने माफीनामे में क्या लिखा?
संस्थान ने अपने आधिकारिक 'X' हैंडल पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा:
'हम साहिल की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु से जुड़ी परिस्थितियों के संबंध में अपने पिछले संचार (Communication) में दिए गए कथनों के लिए माफी मांगते हैं।
प्रशासन ने अपनी गलती स्वीकारते हुए आगे कहा, 'इस घटना तक ले जाने वाले विवरण और परिस्थितियां फिलहाल संबंधित अधिकारियों द्वारा जांच का विषय हैं. जारी जांच को ध्यान में रखते हुए, उचित जांच प्रक्रिया के जरिए तथ्य स्थापित होने से पहले घटनाओं का विवरण देना या उन्हें परिभाषित करना अनुचित था।
क्यों बड़ा है यह यू-टर्न?
किसी भी कैंपस में ऐसी अप्रिय घटना होने के बाद पुलिस फॉरेंसिक और आधिकारिक जांच के जरिए ही सच तक पहुंचती है. ऐसे में बिना रिपोर्ट आए संस्थान का कोई भी बयान जांच की दिशा को प्रभावित कर सकता है।
प्रोफेसर पर भी एक्शन
छात्र साहिल की मौत के मामले में जहां एक तरफ आईआईटी बॉम्बे को अपने शुरुआती बयान पर बैकफुट पर आते हुए सार्वजनिक माफी मांगनी पड़ी है, वहीं दूसरी तरफ कैंपस में बढ़ते जनाक्रोश और विरोध के बीच प्रशासन ने सख्त कदम भी उठाए हैं. मामले से जुड़े विवाद और सोशल मीडिया पर उठे सवालों के बाद संबंधित विभाग के प्रोफेसर के खिलाफ भी प्रशासनिक स्तर पर एक्शन लिया गया है. छात्रों का आरोप था कि प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनहीन रवैये के कारण स्थिति बिगड़ी, जिसके बाद संस्थान ने निष्पक्ष जांच का भरोसा देते हुए यह कदम उठाया है।
डायरेक्टर के इस्तीफे की खबर झूठी: IIT बॉम्बे
कैंपस में मचे बवाल और विरोध प्रदर्शनों के बीच सोशल मीडिया पर आईआईटी बॉम्बे के डायरेक्टर के इस्तीफे को लेकर तमाम तरह की अफवाहें चल रही थीं. इन अटकलों पर विराम लगाते हुए संस्थान ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि डायरेक्टर आईआईटी बॉम्बे ने इस्तीफा नहीं दिया है. संस्थान ने बयान जारी कर कहा कि आईआईटी बॉम्बे के डायरेक्टर ने इस्तीफा नहीं दिया है. हम स्पष्ट रूप से यह कहते हैं कि इससे जुड़ी खबरें पूरी तरह से गलत हैं।
बता दें कि साहिल की सुसाइड से मौत के बाद कैंपस में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं. छात्र अपने 18 पॉइंट चार्टर के साथ डायरेक्टर के इस्तीफे की मांग भी कर रहे थे. फिलहाल स्थानीय पुलिस और जांच एजेंसियां मामले की हर एंगल से तफ्तीश कर रही हैं. साहिल की मौत की असली वजह क्या थी, यह आधिकारिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा।
अब मुंबई क्राइम ब्रांच ने 22 वर्षीय आईआईटी बॉम्बे छात्र की कथित आत्महत्या की जांच अपने हाथ में ले ली है और प्रोफेसर डूल्ला व अन्य को पूछताछ के लिए बुलाने की संभावना है. डूल्ला पर छात्र को प्रताड़ित करने का आरोप है. हालांकि आईआईटी बॉम्बे फैकल्टी फोरम ने प्रोफेसर डूल्ला के साथ एकजुटता जताई है. फोरम ने कहा कि उन्होंने संस्थागत प्रोटोकॉल का पालन करते हुए परीक्षा के दौरान स्मार्टफोन के अनधिकृत इस्तेमाल की रिपोर्ट की थी। फोरम ने कहा कि डूल्ला मिड-सेमेस्टर परीक्षा की निगरानी कर रहे थे और उन्होंने कथित अकादमिक कदाचार की रिपोर्ट संस्थान अधिकारियों को आगे की कार्रवाई के लिए दी।




