राज्य

Uttarakhand News: SC-ST अत्याचार निवारण अधिनियम को लेकर CM धामी सख्त, बोले- बैठक औपचारिकता नहीं, पीड़ितों को समय पर न्याय, सुरक्षा और अधिकार दिलाना सुनिश्चित करें…..

देहरादून. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गठित राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक आयोजित की गई. मुख्यमंत्री ने कहा कि समिति की बैठक केवल औपचारिक समीक्षा तक सीमित न रहे. यह सुनिश्चित किया जाए कि अत्याचार से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति को समय पर न्याय, सुरक्षा, सम्मान और उसका अधिकार मिले. इसके लिए मामलों की नियमित समीक्षा के साथ पूरी व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और प्रभावी बनाया जाए.

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2024 से अब तक अधिनियम के अंतर्गत दर्ज जिन मामलों में विवेचना लंबित है, उनके लंबित रहने के कारणों की समीक्षा करते हुए कहा कि प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए. लंबे समय से लंबित एवं गंभीर प्रकृति के मामलों में पुलिस, प्रशासन और अभियोजन विभाग आपसी समन्वय से प्रभावी कार्रवाई करें. मुख्यमंत्री ने विशेष न्यायालयों में लंबित मामलों की भी नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि पुराने मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए पुलिस और अभियोजन विभाग के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए. मामलों की प्रभावी पैरवी के लिए आवश्यकता के अनुसार विशेष लोक अभियोजकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए.

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि पीड़ितों को अनुमन्य राहत राशि के भुगतान में किसी प्रकार की देरी न हो. उन्होंने कहा कि जिन मामलों में राहत देने में विलंब हुआ है, उनकी अलग से समीक्षा की जाए. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित परिवारों की सहायता केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. आवश्यकता के अनुसार उन्हें चिकित्सा, शिक्षा, सुरक्षा, पुनर्वास और अन्य पात्र सरकारी योजनाओं से भी जोड़ा जाए. गंभीर एवं संवेदनशील मामलों में पीड़ित और उसके परिवार की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए. यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी घटना के कारण प्रभावित परिवार के बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो तथा पात्र बच्चों को छात्रवृत्ति एवं अन्य शैक्षिक सहायता योजनाओं से जोड़ा जाए. प्रभावित परिवारों की काउंसलिंग, चिकित्सा सहायता, सुरक्षा तथा सामाजिक एवं आर्थिक पुनर्वास की व्यवस्थाओं पर भी विचार किया गया.

मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जिले में अधिनियम से संबंधित मामलों की नियमित निगरानी के लिए वरिष्ठ स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अधिनियम के प्रावधानों, संवेदनशील मामलों की विवेचना और पीड़ितों के साथ व्यवहार के संबंध में नियमित प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए. समाज कल्याण, पुलिस एवं अभियोजन विभाग आपसी समन्वय से समय-समय पर रिफ्रेशर प्रशिक्षण आयोजित करें. मुख्यमंत्री ने मामलों की विवेचना, न्यायालयीन स्थिति, राहत राशि और अन्य सहायता की शासन स्तर से प्रभावी निगरानी के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने पर कार्य करने के निर्देश दिए.

उन्होंने कहा कि जिन जिलों में मामलों के निस्तारण, विवेचना अथवा राहत वितरण में अपेक्षित प्रगति नहीं है, उनकी अलग से समीक्षा की जाए. मुख्यमंत्री ने ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में अधिनियम के प्रावधानों, कानूनी अधिकारों और पीड़ितों को मिलने वाली सहायता के संबंध में व्यापक जागरुकता अभियान चलाने के निर्देश दिए. उन्होंने पुलिस, समाज कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व एवं अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने को कहा. यदि किसी जिले या विभाग को अतिरिक्त मानव संसाधन, प्रशिक्षण अथवा बजट की आवश्यकता है तो उसका प्रस्ताव शासन को शीघ्र उपलब्ध कराया जाए.

बैठक में बताया गया कि वर्ष 2024 में अधिनियम के तहत 189 और वर्ष 2025 में 157 अभियोग पंजीकृत हुए. वर्ष 2026 में 15 सितम्बर तक 116 अभियोग पंजीकृत हुए हैं, जिनमें 25 प्रकरण विवेचनाधीन हैं. बैठक में जानकारी दी गई कि वर्ष 2024-25 में 205 पीड़ितों को 228.71 लाख रुपये, वर्ष 2025-26 में 127 पीड़ितों को 143.16 लाख रुपये तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 में 18 सितम्बर तक 104 पीड़ितों को 99.528 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई है. मुख्य सचिव और जनपद स्तर पर जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में बैठकों का नियमित आयोजन किया गया.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button