मिडटर्म चुनाव में हार के बाद बदले ट्रंप के सुर, अब डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर करेंगे काम

वाशिंगटन
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव हारते ही बड़बोले ट्रंप की अकड़ ढीली हो गई है. पूरे चुनाव के दौरान बयानबाजी, पैंतरेबाजी और रिटोरिक्स पर चलने वाले डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वे डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करेंगे ताकि अमेरिका के लिए चीजें अच्छी की जा सकें. जब चुनाव के रुझान आने शुरू हुए तो पार्टी को बुरी तरह पिछड़ता देख राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा कि उन्हें विपक्षी पार्टी के सदस्यों के फोन आए हैं.
सीएनएन के अनुसार 'पोलिटिको' के साथ एक इंटरव्यू में उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका प्रशासन डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करेगा ताकि "देश के लिए चीजें बेहतर हो सकें."
चुनाव की रात लाइवस्ट्रीम के दौरान ट्रंप ने कहा, "हम डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करेंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हमारे देश के लिए सब कुछ अच्छा रहे.यह बहुत महत्वपूर्ण है."
अपनी जुबान में नरमी लाते हुए ट्रंप ने कहा कि भले ही उनके पास डेमोक्रेट्स के नियंत्रण वाली कांग्रेस से आने वाले कानूनों पर वीटो (अधिकार का इस्तेमाल करके रोकना) करने का हक है, लेकिन वह "अगले दो सालों तक बस बैठकर हर चीज पर वीटो नहीं लगाना चाहते." इससे पहले ट्रंप ने कुछ अलग संकेत दिए थे, यहां तक कि उन्होंने खुद को "मिस्टर वीटो" भी कहा था.
दरअसल चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप लगातार अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के समर्थन में उतर रहे थे. उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवारों से यहां तक कहा था कि वे प्रचार के दौरान मतदाताओं से कहें कि ट्रंप भी चुनाव मैदान में हैं. लेकिन नतीजों ने रिपब्लिकन पार्टी के सामने मुश्किल खड़ी कर दी है. डेमोक्रेट्स ने उन राज्यों में भी सेंध लगाई है, जिन्हें लंबे समय से रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है.
ट्रंप ने 'पोलिटिको' को बताया, "उनके फोन आ चुके हैं और वे मेरे साथ मिलकर काम करना चाहते हैं." हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि उन्हें असल में किन लोगों ने फोन किया है.
भले ही ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ने के ट्रंप के फैसले की वजह से रिपब्लिकन पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ा हो, लेकिन राष्ट्रपति ने अपने इस फैसले का बचाव किया. उन्होंने कहा, "कई लोग कहते हैं कि ईरान की वजह से तेल की कीमतें प्रभावित हुईं, लेकिन मुझे पूरा यकीन है कि ईरान को लेकर मेरा फैसला हमारे देश और पूरी दुनिया के दीर्घकालिक हित में था. यह बिल्कुल सही फैसला था और आज भी सही है."
चुनावी नतीजों से कैसे कमजोर हो गए ट्रंप
प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) और सीनेट, दोनों में डेमोक्रेटिक पार्टी की बढ़त के बाद अब अमेरिकी संसद का समीकरण बदलने जा रहा है. चुनाव नतीजों के शुरुआती रुझानों और मीडिया अनुमानों में डेमोक्रेट्स को दोनों सदनों में बहुमत मिलने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी संसद पर कंट्रोल नहीं रह जाएगा.
अब फैसले लेने, हाउस से बिल पास कराने के लिए उन्हें डेमोक्रेट्स की सहयोग की जरूरत होगी.
डेमोक्रेट्स ट्रंप प्रशासन, उनके परिवार और सहयोगियों से जुड़े मामलों की जांच कराने की तैयारी में हैं. सीनेट में बहुमत मिलने से राष्ट्रपति की ओर से की जाने वाली नियुक्तियों पर भी डेमोक्रेट्स का प्रभाव बढ़ेगा. ऐसे में अगर ट्रंप के खिलाफ जांच आती है तो न सिर्फ उन्हें जांच का सामना करना पड़ेगा बल्कि अपनी नीतियों से जुड़े बिल को पास कराने के लिए डेमोक्रेट्स की मदद भी लेनी पड़ेगी.
चुनाव प्रचार के दौरान डेमोक्रेट्स पर लगातार हमलावर रहे ट्रंप ने अब उन्हें बधाई दी है और साथ मिलकर काम करने की बात कही है.
ट्रंप ने CBS News से बातचीत में कहा, "मेरा संदेश है कि डेमोक्रेट्स को बधाई. मैं अपने देश की भलाई के लिए उनके साथ काम करने को लेकर उत्सुक हूं." उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि डेमोक्रेट्स भी उनके साथ काम करना चाहेंगे. हालांकि, इसके साथ ही ट्रंप ने अपने वीटो अधिकार का जिक्र करते हुए कहा कि अगर विपक्षी पार्टी उनके साथ काम नहीं करना चाहेगी तो वह उसके विधेयकों को वीटो कर सकते हैं.
अब ट्रंप के सामने होगी नई चुनौती
डेमोक्रेट्स के दोनों सदनों में बहुमत हासिल करने से ट्रंप के लिए अगले दो साल में सरकार चलाना पहले के मुकाबले अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है. प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हकीम जेफ्रीज स्पीकर बन सकते हैं. इसके साथ ही डेमोक्रेट्स को संसदीय समितियों और जांच से जुड़ी शक्तियां भी मिलेंगी.
ट्रंप के लिए यह स्थिति नई नहीं है. 2018 के मिडटर्म चुनाव में भी रिपब्लिकन पार्टी ने प्रतिनिधि सभा का नियंत्रण गंवा दिया था. उस समय भी ट्रंप ने विपक्ष के साथ मिलकर काम करने की बात कही थी, लेकिन दोनों पार्टियों के बीच कई मुद्दों पर टकराव जारी रहा था. अब एक बार फिर अमेरिकी संसद में सत्ता का संतुलन बदलने के साथ ट्रंप के सामने विपक्ष के साथ तालमेल बैठाने की चुनौती होगी.




